आजमगढ़ चर्च कमेटी में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी
समालोचक लेखिका एवं स्वतंत्र पत्रकार
चर्च केवल प्रार्थना का स्थान नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा, समानता और ईमानदारी की शिक्षा देने वाली संस्था है। इसलिए चर्च की पास्टरेट कमेटी का गठन पारदर्शी, निष्पक्ष और निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए। जब कमेटी की सदस्यता, चंदे के हिसाब और पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर सवाल उठते हैं, तो उनका स्पष्ट उत्तर देना संबंधित पदाधिकारियों का दायित्व बनता है।
आजमगढ़ चर्च की कमेटी को लेकर कुछ गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कमेटी में वेस्ली स्कूल के तीन शिक्षक सदस्य हैं। कुछ सदस्यों के चंदे की स्थिति, कोषाध्यक्ष द्वारा हिसाब प्रस्तुत किए जाने तथा पूर्व में लगातार दो सत्रों तक सदस्य रहने के बाद तीसरे सत्र में पुनः सदस्य बनने की पात्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह भी प्रश्न है कि यदि कोई सदस्य वर्ष में केवल एक-दो बार ही चर्च आता है, तो उसकी सक्रियता और सदस्यता के निर्धारित मानदंडों की जाँच कैसे की जाती है?
इन सवालों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का अपमान करना नहीं, बल्कि चर्च की व्यवस्था में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों, नियमावली और आधिकारिक स्पष्टीकरण से होनी चाहिए।
कमेटी गठन और बैंक खाते पर सवाल
यदि नई कमेटी का गठन 11 अक्टूबर 2026 को हुआ है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अप्रैल 2026 से 10 अक्टूबर 2026 तक कमेटी किस वैधानिक या संस्थागत व्यवस्था के अंतर्गत कार्य कर रही थी। क्या उस अवधि के निर्णय, आय-व्यय और चंदे का पूरा हिसाब उपलब्ध है?
एक अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न बैंक खाते में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता का है। क्या नए कोषाध्यक्ष का नाम बैंक में दर्ज कराया जाएगा या पुराने कोषाध्यक्ष के नाम से ही लेन-देन जारी रहेगा? इसका उत्तर संबंधित संस्था के नियमों, कमेटी के वैध प्रस्ताव और बैंक की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दिया जाना चाहिए।
चर्च के चंदे और दान का पैसा श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ा होता है। इसलिए प्रत्येक आय और व्यय का लिखित हिसाब, रसीदें, बैंक विवरण और ऑडिट की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए। यदि किसी कोषाध्यक्ष ने हिसाब नहीं दिया है, तो नियमानुसार उनसे हिसाब माँगा जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।
नियम सबके लिए समान हों
किसी भी कमेटी में पद या सदस्यता व्यक्तिगत संबंधों, प्रभाव अथवा चापलूसी के आधार पर नहीं, बल्कि निर्धारित योग्यता, सक्रिय भागीदारी और नियमों के अनुसार होनी चाहिए। यदि नियम किसी व्यक्ति को लगातार तीसरे सत्र में सदस्य बनने से रोकते हैं, तो वही नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। इसी तरह चंदे और सदस्यता की शर्तों की भी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
मेरा स्पष्ट मत है कि चर्च में पद सम्मान और सेवा की जिम्मेदारी है, निजी अधिकार नहीं। धर्म के नाम पर किसी प्रकार की मनमानी या वित्तीय अनियमितता को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। यदि व्यवस्था सही है, तो अभिलेख सामने रखने और सवालों का उत्तर देने में संकोच कैसा?
अंत में कुछ सीधे सवाल
इन सवालों का उत्तर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि प्रमाण और पारदर्शिता से दिया जाना चाहिए।
चर्च किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं, विश्वासियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। धर्म का सम्मान तभी बढ़ेगा, जब सेवा में ईमानदारी, कमेटी में निष्पक्षता और धन के उपयोग में पारदर्शिता होगी।
अनीता साइलेस
समालोचक लेखिका | स्वतंत्र पत्रकारसे जुड़ा होता है। इसलिए प्रत्येक आय और व्यय का लिखित हिसाब, रसीदें, बैंक विवरण और ऑडिट की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए। यदि किसी कोषाध्यक्ष ने हिसाब नहीं दिया है, तो नियमानुसार उनसे हिसाब माँगा जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।
नियम सबके लिए समान हों किसी भी कमेटी में पद या सदस्यता व्यक्तिगत संबंधों, प्रभाव अथवा चापलूसी के आधार पर नहीं, बल्कि निर्धारित योग्यता, सक्रिय भागीदारी और नियमों के अनुसार होनी चाहिए। यदि नियम किसी व्यक्ति को लगातार तीसरे सत्र में सदस्य बनने से रोकते हैं, तो वही नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। इसी तरह चंदे और सदस्यता की शर्तों की भी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
मेरा स्पष्ट मत है कि चर्च में पद सम्मान और सेवा की जिम्मेदारी है, निजी अधिकार नहीं। धर्म के नाम पर किसी प्रकार की मनमानी या वित्तीय अनियमितता को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। यदि व्यवस्था सही है, तो अभिलेख सामने रखने और सवालों का उत्तर देने में संकोच कैसा?
अंत में कुछ सीधे सवाल नई पास्टरेट कमेटी के गठन की तारीख और स्वीकृति का आधिकारिक विवरण क्या है? सदस्यों की पात्रता और चंदे की स्थिति की जाँच किस आधार पर हुई? पूर्व कोषाध्यक्ष ने पूरा हिसाब प्रस्तुत किया है या नहीं? बैंक खाते में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को बदलने की प्रक्रिया कब पूरी होगी? अप्रैल से अक्टूबर 2026 तक के आय-व्यय और निर्णयों का विवरण सदस्यों के सामने कब रखा जाएगा? इन सवालों का उत्तर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि प्रमाण और पारदर्शिता से दिया जाना चाहिए।
चर्च किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं, विश्वासियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। धर्म का सम्मान तभी बढ़ेगा, जब सेवा में ईमानदारी, कमेटी में निष्पक्षता और धन के उपयोग में पारदर्शिता होगी।
अनीता साइलेस समालोचक लेखिका | स्वतंत्र पत्रकार
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